भले ही आज की तारीख ६ जनवरी है, पर आज मैं ३१ दिसंबर के बारे में लिख रही हूँ.
उस दिन रात को मेरा show था. पर शाम को उसके रिहर्सल के लिए बुलाया था. सबसे पहले अभ्यास कर घर वापस आकर फिर इत्मीनान से जाने को कहा Texter ने. मैंने वैसा ही किया. सबसे पहले मैं पहुँची. वो लोग नए ख़रीदे drum सेट को जोड़ रहे थे. मैंने भी उनके काम में हाथ लगाया. मुझे अच्छा लग रहा था. बच्चों की तरह पुर्जों को एकत्र कर एक अच्छी सी चीज़ में बदलने का मज़ा ही कुछ और है. थोड़ी देर में रघु और फिर पवन आ गए. फिर कार्तिक भी. सब ने मिलकर गाने की practice की. हम तीन निकल आए. रास्ते में बाते करते हुए पता चला कि पवन हैदराबादी है, और अच्छा खाना भी बना लेता है. संगीत से सम्बंधित लोगों से बातें करना, contacts बढ़ाना, अच्छा ही लगता है. घर वापस आकर देखा कि पतिदेव ने pizza मंगवा रखा है. जल्दी खाकर मै तैयार होने लगी. पर जैसा हर बार होता है, दुविधा में फंस गयी कि क्या पहनू, किस के साथ क्या अच्छा लग रहा है आदि. काफी सोचने के बाद पहना. पर पता नहीं क्यों खास खुश नहीं थी मैं. काफी देर इंतज़ार के बाद, स्नो से संभलते हुए हम पहुंचे 'Dorrians'. उनका soundcheck चल रहा था. सत्तम ने अपनी दीदी जीजाजी से मिलवाया जिन्होंने फिर मेरी प्रशंसा की. भीड़ ना के बराबर था. ठीक १२ बजे सबने जोर से चिल्लाया 'हैप्पी न्यू इयर'. मैं जाकर रोनी से लिपट गयी. वहां 'दिब्बो' से मुलाकात हुई. उसके साथ कुछ देर तक बातें की. मेरे तीन गाने हुए पर पवन के साथ जो किया था वो और नहीं हुआ. पवन थोडा गुस्सा हो गया जब band की तस्वीर के लिए उसे बुलाया. पर एक बात तो है. सबने मेरी बहुत प्रशंसा की, बहुत प्रोत्साहित किया. अच्छा लगा. रघु के साथ लौटते वक़्त बातें हुई. ये पश्चिमी गाने लगभग एक से chords पर आधारित होते हैं. इसलिए हमें एक जैसे लगते हैं, वैचित्रहीन. जो भी हो, नए साल की शुरुयात गाने के साथ हुई, तो इससे अच्छी बात क्या हो सकती है?