Nov 17, 2010
बुधवार, 17th nov
दोपहर फोन की घंटी बजी. देवयानी ने एक बुरी खबर दी कि मेरी एक छात्रा आज से और गाना सीखने नहीं आएगी. खबर छात्रा के लिए अच्छी थी क्योंकि उसे नौकरी मिल गयी थी. अभी कुछ दिन तो उसे नौकरी के साथ अपने आप को व्यवस्थित करने में लगेंगे. ऊपर से हफ्ते के बीच, शाम के वक्त शायद ही उसे समय मिले. मुझे तभी मेरे दूसरे छात्र गिरीश की याद आई. बेचारे को फिर निजी कक्षा के जैसे शुल्क देनी पड़ेगी. अगर कक्षा में और कोई आए तो शुल्क बँट जाती है. मुझे उसके लिए बहुत बुरा लग रहा था. पर मेरे हाथों में कुछ नहीं था जो मैं उसके लिए कर सकूँ. कक्षा में गयी. गिरीश आया. तभी पता चला कि आज एक नयी लड़की आने वाली है उस ही कक्षा के लिए. मैंने तभी सोचा कि इसे क्या कहें? आज एक ने छोड़ा, तो फिर कोई और जुड़ने चला आया या कहें आई. उसका नाम पायल था. उसने काफी साल पहले संगीत सीखा था और अनेक सालों से रियाज़ से बाहर है. पर उसने ४ वर्ष तक की परीक्षा उत्तीर्ण की है. इसका मतलब है कि वह सीखी हुई है. मैंने उससे गवाया तो पता चला कि अच्छा गाती है. सिर्फ कुछ दिन और अभ्यास की ज़रूरत है. आज उसका परीक्षण क्लास था. उसे ७ बजे के समय से थोड़ी आपत्ति है. देखते हैं वह शुरू करती है या नहीं; गिरीश की किस्मत चमकती है या नहीं.
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