16th Nov 2010. मेरे अनुसार, दुनिया को देखने का नजरिया हर इंसान का अपना अलग होता है. इसलिए जहाँ कोई घटना किसीको गहरी सोच में डाल देती है, वहीँ वह किसीके लिए कोई मायने ही नहीं रखती. मेरी ज़िन्दगी में घटी कोई बात भले ही किसी और पर कोई प्रभाव न डाले, पर मुझपर उसका असर होना स्वाभाविक है. पर ऐसा भी नहीं है कि हर घटना मुझे सोचने पर मजबूर करती है. शायद वही घटना किसी और के साथ हो तो वह ज्यादा प्रभावित होगा/होगी क्योंकि जैसा मैंने अभी कहा कि हर इंसान अलग सोचता है.
मानव जीवन पाया है हमने, जीवों में सर्वोत्कृष्ट माना जाता है जिसे. इस जीवन की अवधि सीमित है. इसलिए एक दिन भी ऐसा गुजरने ना पाए जो हमारे लिए महत्वपूर्ण ना हो.रात को सोने से पहले गुज़रे दिन की ओर नज़र डालो तो प्रायः ही ऐसा होता है कि कुछ ख़ास नहीं दीखता. पर मेरा यही मानना है कि ढूंढो, दिल-ओ-दिमाग से ढूंढो और सागर मंथन की तरह उस दिन को मथ डालो. कहीं तो वो सीप छिपा होगा जिसके भीतर उस दिन की वह सार्थक घटना वाली मोती छिपी होगी. मोती ना मिले तो जीवन का एक कीमती दिन व्यर्थ गया समझो जो येन-तेन-प्रकारेण वापस नहीं आ सकता.
अपने दैनिक जीवन के उस मोती को ढूंढ निकालकर इस ब्लॉग में पेश करुँगी मैं. १९९८ से यह काम कागज़ कलम द्वारा करती आ रही हूँ. अब अपने ब्लॉग में करुँगी ताकि मेरी साहित्य(हिंदी भाषा) की चर्चा बनी रहे और साथ ही अगर इसे पढ़कर आपका मनोरंजन हो तो क्या कहने. मेरा ब्लॉग लिखना सार्थक हो जाएगा अगर यह आप में से किसी के चेहरे पर भी मुस्कराहट या माथे पर शिकन ला सके.
डायरी लेखन की एक बहुत प्यारी बात यह भी है कि आज से कुछ दिनों या सालों बाद जब आज की तारीख पर वापस नजर डाली जाती है तो झट उस दिन की स्मृति ताज़ी हो जाती है, दिल और चेहरे पर उसका असर साफ़ झलक जाता है. इस तरह जीवन के हर दिन ताज़े रह जाते हैं.
मेरी आज की निधि मेरे ब्लॉग में डायरी लेखन की शुरुआत है.
डायरी लेखन की एक बहुत प्यारी बात यह भी है कि आज से कुछ दिनों या सालों बाद जब आज की तारीख पर वापस नजर डाली जाती है तो झट उस दिन की स्मृति ताज़ी हो जाती है, दिल और चेहरे पर उसका असर साफ़ झलक जाता है. इस तरह जीवन के हर दिन ताज़े रह जाते हैं.
मेरी आज की निधि मेरे ब्लॉग में डायरी लेखन की शुरुआत है.
My dear sister,
ReplyDeleteIt shall please you to know,the words that you have written here are making sense to me. For, afterall it was you who had inducted me to the world of devnagar and in doing so instilled in me the rudiments of understanding for the script and its intricacies that now allows me to mix freely with my friends from all parts of India and of course also to interpret this blog properly(i hope).
As for the blog, I have always supported the notion that talent such as yours should never be limited to your exam papers or for that matter even to your research papers. For,it is the duty of every artist to lay bare his/her art in front of evryone so that they might benefit from its glory.
Wishing you and your blog, a grand success, I remain,
Your brother,
Prabal
Thanks Tiklu..My dearest bro..Though younger to me, still would like to call you my 'Big Bro' for not only your built, but also your level of Knowledge and Intelligence which is something I didn't witness in the present generation kids. Your wishes means a lot to me. Thankx again. May God Bless you hamesha..
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