चारों और फूल थे खिले
जब तुम थे मुझे मिले...
सब तरफ थी चिड़ियों की आवाज़
जब तुमने खोला था 'वह' मीठा राज़..
बहारों ने क्या गीत था गाया!!!
जब तुमने मुझे हलके से छुआ...
पत्तों ने था क्या झूमा
जब तुमने मुझे पहली बार चूमा...
क्या गरजे थे वह बदल
जब प्यार में तुम हो उठे थे पागल...
नदियाँ बलखा उठीं थी खोकर होश
जब मोहब्बत में थे तुम मदहोश...
क्या चमक दिखलाई थी उन तारों ने
जब मैं समाई थी तुम्हारी बाँहों में...
सच!!!क्या थी वह चांदनी रात...
जो बिताई थी हमने साथ-साथ...
Wow!!nice poem..
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